प्रकृति जिंदगी हमेशा अपनी इच्छा से चली,मेरी इच्छा से कभी चली ही नहीं | सफर सब अपने हिसाब से खुद ही कट गए,मेरे चाहने से रास्ते कभी मुड़े ही नहीं | फूल चमन में जब खिले अपने आप ही खिल गए,मेरे चाहने से कभी खिले ही नहीं | बहार भी जब आई खुद ही चली…
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