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Category: Poetry

  • प्रकृति

    प्रकृति

    प्रकृति जिंदगी हमेशा अपनी इच्छा से चली,मेरी इच्छा से कभी चली ही नहीं | सफर सब अपने हिसाब से खुद ही कट गए,मेरे चाहने से रास्ते कभी मुड़े ही नहीं | फूल चमन में जब खिले अपने आप ही खिल गए,मेरे चाहने से कभी खिले ही नहीं | बहार भी जब आई खुद ही चली…

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  • खुमारी

    खुमारी

    तुम्हारा ख्याल चला आया था एक दिन

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  • इंतज़ार

    इंतज़ार

    खो ना जाएँ जज़्बात कहीं

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  • फ़िक्र

    फ़िक्र

    छोड़ दी अब फ़िक्र मैंने सारी

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  • क्या तुम वही हो

    क्या तुम वही हो

    तुम तो चाँद थीं…

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